अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

टिड्डी नियंत्रण में कृषि मंत्रालय के अलावा कौन से अन्य एजेंसियां / मंत्रालय शामिल हैं?

रेगिस्तानी टिड्डी आपातकाल के दौरान कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अलावा, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, अन्य मंत्रालय (विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा, पृथ्वी विज्ञान, नागरिक उड्डयन और संचार) और अन्य हितधारक (जैसे राज्य सरकारें, स्वास्थ्य विभाग, प्रगतिशील किसान) टिड्डी नियंत्रण में शामिल होते हैं। इन हितधारकों की भूमिका और जिम्मेदारियों को योजना के कार्यान्वयन भाग में परिभाषित किया गया है।

यदि कोई एयरक्राफ्ट छिड़काव यंत्र उपलब्ध नहीं हैं, तो ग्राउंड-आधारित छिड़काव यंत्र का उपयोग करके ऊंचे पेड़ों में टिड्डियों का छिड़काव कैसे किया जा सकता है?

अधिकांश ग्राउंड स्प्रेयर, यहां तक कि मोटराइज्ड एयर ब्लास्ट स्प्रेयर, ऊंचे पेड़ों में बैठे टिड्डी समुह तक नहीं पहुंच सकते हैं और इन परिस्थितियो में नियंत्रण के प्रयास कीटनाशक के अपव्यय के साथ-2 स्प्रे क्लाउड के नीचे खड़े ऑपरेटरों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। हालाँकि, एक छिड़काव यंत्र का संशोधित संस्करण विस्तारित मस्तूल के साथ उपलब्ध है, जिसका उपयोग पेड़ों में लगभग 10 मीटर की ऊँचाई तक किया जा सकता है I इसे असमतल जमीन पर आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि मस्तूल असमतल जमीन पर टूट सकता है, इसलिए इसे अलग-अलग स्थानों पर छोटे-2 टिड्डी समुह के नियंत्रण में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसमे खुराक (दर) की अवधारणा लागू नहीं होती है, और प्रक्रिया अपव्ययी होने की संभावना होती है, लेकिन प्रभावी हो सकती है।

ULV छिड़काव करते समय किन महत्वपूर्ण कारकों पर विचार किया जाना चाहिए?
  • बूंद आकार (Atomizer पर निर्भर करता है)
  • बूंद स्पेक्ट्रम (Atomizer पर निर्भर करता है)
  • कार्य दर (स्प्रेयर प्लेटफॉर्म और फ्लो दर पर निर्भर करता है)
  • ऑपरेटर सुरक्षा (विभिन्न डिजाइन विशेषताओं पर निर्भर करती है)
  • उपयोग में आसानी (विभिन्न डिजाइन विशेषताओं पर निर्भर करता है)
  • विश्वसनीयता (निर्माण सामग्री और डिजाइन पर निर्भर करती है)
स्प्रे लक्ष्य क्या है? टिड्डियाँ या वनस्पति?

अधिकांश छिड़काव के लिए, दोनों ही लक्ष्य हैं क्योंकि टिड्डी को सीधे संपर्क से कुछ खुराक मिलती है, और कुछ अप्रत्यक्ष संपर्क और उदर की कार्रवाई से - छिड़काव की गई वनस्पति के खाने से।

टिड्डी नियंत्रण का संचालन कौन करता है?

टिड्डी सर्वेक्षण और नियंत्रण मुख्य रूप से "कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण मंत्रालय" की जिम्मेदारी है और टिड्डी प्रभावित राज्यों में इसका संचालन टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO) द्वारा किया जाता हैं। कई स्थानीय टिड्डी मंडल कार्यालय (LCO's) भी हैं जो सर्वेक्षण और नियंत्रण कार्यों में सहायता करते हैं। टिड्डी प्रकोप और विपत्तियों के समय विभिन्न हितधारक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी बाहरी सहायता की आवश्यकता होती है।

छिड़काव के बाद भी टिड्डी जीवित हैं ! नियंत्रण विफलता के संभावित कारण क्या हैं?

यदि नियंत्रण विफल रह्ता है तो यह कीटनाशक को दोष देने के लिए लुभाता है, जबकि वास्तव में नियंत्रण विफलता कीटनाशक प्रयोग की समस्याओं के कारण होने की अधिक संभावना है। नियंत्रण विफलता कई कारकों के कारण हो सकती है, जिसमें बूंदें बहुत बड़ी या बहुत छोटी, हवा बहुत तेज या बहुत कमजोर, मजबूत संवहन, स्प्रे उत्सर्जन बहुत अधिक होना, कीटनाशी की कम मात्रा, टिड्डीयों का वनस्पति के बीच मॆं छिपे होना और छिड़काव से पूर्व टिड्डीयों का संचलन इत्यदि। जब इन कारकों को समाप्त कर दिया गया है, तब कीटनाशक को संदेह किया जाना चाहिए और सक्रिय संघटक सामग्री के परीक्षण के लिए भेजा जाना चाहिए।

टिड्डियों के विभिन्न नियंत्रण उपायों की व्याख्या करें?

यांत्रिक तरीके – खाइयों को खोदना, मारना और जलाना ।
विषाक्त भोजन – कीटनाशी युक्त विषाक्त टिड्डी भोजन बिखेर कर ।
पाउडर डस्टिंग – कीटनाशक के साथ एक अच्छी धूल का प्रयोग करना ।
तरल कीटनाशी का छिड़काव

(अल्ट्रा लो वॉल्यूम) ULV उपकरण का उपयोग करके टिड्डियों के छोटे समूह कैसे नियंत्रित किये जा सकते हैं?

ULV छिड़काव के द्वारा छोटे लक्ष्यों को छिड़काव करना अनुपयोगी हो सकता है। बहुत छोटे लक्ष्य के लिए हाथ से स्प्रे करने वाले सबसे उपयुक्त प्रकार के स्प्रेयर का उपयोग किया जाना चाहिए । यदि समूह टिड्डी दल की चौड़ाई से छोटे हैं, तो उनमें से थोड़ी दूरी पर एक डबल पास बनाया जा सकता है।

टिड्डियों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

वर्तमान में रेगिस्तानी टिड्डी दल और हॉपर बैंड को नियंत्रित करने की प्राथमिक विधि मुख्य रूप से ऑर्गेनोफ़ॉस्फ़ेट केमिकल्स के साथ है, छोटी केंद्रित खुराक (जिसे अल्ट्रा लो वॉल्यूम (ULV) फॉर्मुलेशन के रूप में संदर्भित किया जाता है) जिसका वाहन और हवाई स्प्रेयर द्वारा और छोटी दूरी के हाथ से पकड़ने वाले स्प्रेयर के द्वारा छिड़काव होता है ।

क्या रेगिस्तानी टिड्डियों का प्लेग किसी नियमितता के साथ होता हैं?

पहले रेगिस्तानी टिड्डी का हमला प्लेग चक्रों के चरणों में हुआ करता था। भारत ने अतीत में कई टिड्डी प्लेग और टिड्डी आक्रमणों को देखा है । 1962 तक भारत में लगभग 12 टिड्डी प्लेग देखी गईं, उसके बाद कोई टिड्डियों का प्लेग नहीं हुआ है । इसी तरह, 1964 से 1997 तक 13 टिड्डी उतार चढ़ाव दर्ज किए गए। 1998, 2002, 2005, 2007 और 2010 की अवधि के दौरान छोटे पैमाने पर स्थानीयकृत टिड्डी के प्रजनन और नियंत्रण को भी रिपोर्ट किया गया। 2010 से 2018 तक, स्थिति शांत रही और बड़े पैमाने पर कोई प्रजनन नहीं हुआ। वर्ष 1993 के पश्चात, 26 से भी अधिक वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2019 में 276 तथा वर्ष 2020 (अगस्त, 2020 तक) कुल 103 रेगिस्तानी टिड्डी के दलों का आक्रमण हुवा । जिसके कारण वर्ष 2019 में राजस्थान और गुजरात राज्य में कृषि फसलों को भारी नुकसान हुआ, जिसके लिए सरकार द्वारा प्रभावित किसानों को क्षति पूर्ति मुआवजा दिया गया है। वर्ष 2020 के दौरान टिड्डी प्लेग को रोकने के लिए स्थापित टिड्डी चेतावनी संगठन तथा क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के द्वारा टिड्डी रोकथाम के लिए किए गए संचयी प्रयासों एवं खाद्य और कृषि संगठन के समग्र समन्वय के फलस्वरूप कोई फसल नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, राजस्थान और गुजरात राज्य में कुछ स्थानों पर समय-समय पर रेगिस्तानी टिड्डियों के एकान्त चरण की सूचना प्राप्त हुई है।

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